26 जुलाई केवल एक तारीख नहीं है, बल्कि यह भारत के अदम्य साहस, अद्वितीय पराक्रम और राष्ट्रभक्ति का वह स्वर्णिम अध्याय है, जिसने पूरी दुनिया को यह संदेश दिया कि भारतीय सैनिक अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए किसी भी चुनौती के सामने अडिग खड़े रह सकते हैं। कारगिल विजय दिवस उन 527 अमर वीरों के सर्वोच्च बलिदान को नमन करने का अवसर है, जिन्होंने दुर्गम पहाड़ियों, शून्य से नीचे तापमान और दुश्मन की मजबूत चौकियों के बीच अपने प्राणों की आहुति देकर भारत का तिरंगा शान से लहराया। यह दिन केवल एक सैन्य विजय का प्रतीक नहीं, बल्कि राष्ट्र के स्वाभिमान, एकता और अटूट संकल्प का पर्व है।

इस ऐतिहासिक विजय के 27 वर्ष पूरे होने पर हम जब कारगिल के रणक्षेत्र को स्मरण करते हैं, तो हिमाचल प्रदेश का योगदान गर्व से हमारे सामने खड़ा दिखाई देता है। छोटे भौगोलिक आकार वाला यह पर्वतीय राज्य हमेशा से देश की सीमाओं का प्रहरी रहा है। यहां की मिट्टी ने ऐसे वीर सपूतों को जन्म दिया है, जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा को अपने जीवन का सर्वोच्च धर्म माना। कारगिल युद्ध में भारत के 527 शहीदों में से 53 वीर सपूत हिमाचल प्रदेश के थे। यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उस भावना का प्रमाण है कि जब देश पुकारता है तो हिमाचल का हर घर अपने बेटे को सीमा पर भेजने के लिए तैयार रहता है।

कारगिल युद्ध दुनिया के सबसे कठिन युद्धक्षेत्रों में से एक में लड़ा गया। लगभग 16 से 18 हजार फीट की ऊंचाई, ऑक्सीजन की कमी, दुर्गम पहाड़ियां और लगातार दुश्मन की गोलाबारी के बीच भारतीय सैनिकों ने जो साहस दिखाया, वह सैन्य इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन कठिन परिस्थितियों में हमारे सैनिकों ने केवल दुश्मन को पराजित नहीं किया, बल्कि दुनिया को यह भी दिखाया कि भारतीय सेना का मनोबल किसी भी हथियार से अधिक शक्तिशाली है।

हिमाचल के वीरों की यही परंपरा सदियों पुरानी है। यहां का युवा बचपन से ही अनुशासन, कठिन परिश्रम और संघर्षपूर्ण जीवन का अभ्यस्त होता है। पहाड़ों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियां उसे शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाती हैं। यही कारण है कि भारतीय सेना में आज भी हर दसवां सैनिक हिमाचल प्रदेश से है। यह किसी भी छोटे राज्य के लिए असाधारण उपलब्धि है। यह केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा की वह परंपरा है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रही है।

जब हम कारगिल की बात करते हैं तो कैप्टन विक्रम बत्रा का “ये दिल मांगे मोर” आज भी हर भारतीय के हृदय में गूंजता है। कैप्टन सौरभ कालिया का बलिदान देश कभी नहीं भूल सकता। कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वरिष्ठ अधिकारी कर्नल विश्वनाथ सिंह की वीरता आज भी प्रेरणा देती है। उनके साथ युद्ध लड़ने वाले ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर आज भी हर वर्ष कारगिल युद्ध स्मारक जाकर अपने साथियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। यह केवल एक सैनिक का अपने साथियों के प्रति सम्मान नहीं, बल्कि भारतीय सेना की उस गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है जिसमें शहीद कभी भुलाए नहीं जाते।

हिमाचल प्रदेश की सैन्य विरासत केवल कारगिल तक सीमित नहीं है। स्वतंत्र भारत का पहला परमवीर चक्र मेजर सोमनाथ शर्मा को मिला। इसके बाद कैप्टन विक्रम बत्रा और राइफलमैन संजय कुमार ने भी परमवीर चक्र प्राप्त कर वीरभूमि हिमाचल का गौरव बढ़ाया। आज तक हिमाचल प्रदेश के सैनिकों को 1 हजार से अधिक  वीरता पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें चार परमवीर चक्र, दो अशोक चक्र, दस महावीर चक्र, अनेक कीर्ति चक्र, वीर चक्र, शौर्य चक्र तथा सैकड़ों सेना, नौसेना और वायुसेना पदक शामिल हैं। आजादी से पहले भी हिमाचल के वीरों को विक्टोरिया क्रॉस और जॉर्ज क्रॉस जैसे सर्वोच्च सम्मान प्राप्त हुए। यह उपलब्धियां बताती हैं कि वीरता हिमाचल की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।

यह गर्व का विषय है कि देश की रक्षा में हिमाचल का योगदान उसकी जनसंख्या से कहीं अधिक है। हर वर्ष भारतीय सैन्य अकादमियों में चयनित होने वाले अधिकारियों में भी हिमाचल प्रदेश अग्रणी राज्यों में शामिल रहता है। सीमाओं पर तैनात हजारों सैनिक आज भी देश की सुरक्षा में दिन-रात लगे हुए हैं। इनके परिवार गांवों में रहकर त्याग, धैर्य और साहस का परिचय देते हैं। इसलिए जब हम सैनिकों के योगदान की बात करते हैं तो उनके परिवारों के त्याग को भी उतना ही सम्मान देना चाहिए।

कारगिल विजय दिवस केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि भविष्य के प्रति हमारी जिम्मेदारियों का भी स्मरण कराता है। आज युद्ध का स्वरूप बदल रहा है। पारंपरिक युद्धों के साथ साइबर सुरक्षा, ड्रोन तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक सैन्य तकनीक का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में हमें अपने युवाओं को केवल सेना में भर्ती होने के लिए ही नहीं, बल्कि रक्षा अनुसंधान, सैन्य तकनीक, साइबर सुरक्षा और नवाचार के क्षेत्रों में भी आगे आने के लिए प्रेरित करना होगा।

सीमावर्ती और जनजातीय क्षेत्रों का विकास भी राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बेहतर सड़कें, संचार व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाएं और आधुनिक बुनियादी ढांचा केवल विकास के साधन नहीं, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत आवश्यक हैं। पांगी-भरमौर जैसे सीमावर्ती एवं दुर्गम क्षेत्रों के लोग सदैव राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते आए हैं। यहां के अनेक परिवारों ने अपने बेटों को सेना में भेजा है और अनेक वीरों ने सर्वोच्च बलिदान दिया है। इसलिए इन क्षेत्रों का समग्र विकास भी राष्ट्र निर्माण का ही एक महत्वपूर्ण आयाम है।

आज भी हिमाचल प्रदेश के पूर्व सैनिकों और युवाओं के मन में एक अपेक्षा है कि जिस राज्य ने भारतीय सेना को इतनी बड़ी संख्या में वीर सैनिक और अधिकारी दिए हैं, उसे भारतीय सेना में एक अलग हिमाचल रेजिमेंट या बटालियन के रूप में भी उचित प्रतिनिधित्व मिले। यह केवल एक प्रशासनिक मांग नहीं, बल्कि हिमाचल की ऐतिहासिक सैन्य परंपरा और योगदान के सम्मान का विषय है। इस दिशा में गंभीर विचार होना चाहिए ताकि वीरभूमि हिमाचल की गौरवशाली सैन्य विरासत को और सशक्त पहचान मिल सके।

विजय दिवस हमें यह भी सिखाता है कि राष्ट्र की सुरक्षा केवल सेना की जिम्मेदारी नहीं होती। एक जागरूक नागरिक, एक ईमानदार शिक्षक, एक समर्पित किसान, एक वैज्ञानिक और एक चिकित्सक—सभी अपने-अपने क्षेत्र में राष्ट्र निर्माण के सैनिक हैं। जब पूरा समाज अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करता है, तभी देश मजबूत बनता है।

आज आवश्यकता है कि हम अपने बच्चों को कारगिल के वीरों की गाथाएं सुनाएं, उन्हें सैनिकों के त्याग से परिचित कराएं और राष्ट्रभक्ति को केवल नारों तक सीमित न रखकर जीवन का मूल्य बनाएं। शहीदों का सम्मान तभी सार्थक होगा जब हम उनके सपनों का भारत बनाने में अपना योगदान देंगे।

कारगिल की चोटियों पर फहराया गया तिरंगा केवल उस युद्ध की विजय का प्रतीक नहीं था, बल्कि यह संदेश था कि भारत की संप्रभुता और अखंडता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। हमारे वीर सैनिकों ने अपने रक्त से यह इतिहास लिखा है और आने वाली पीढ़ियां सदैव उनकी ऋणी रहेंगी।

विजय दिवस के इस पावन अवसर पर मैं कारगिल के सभी अमर शहीदों, हिमाचल प्रदेश के वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों और वर्तमान में देश की सीमाओं पर तैनात प्रत्येक जवान को शत-शत नमन करता हूं। उनके साहस, शौर्य और सर्वोच्च बलिदान के कारण ही हम सुरक्षित हैं और स्वतंत्र भारत का तिरंगा गर्व के साथ लहरा रहा है।

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