शिमला, 10 मार्च। लोक भवन शिमला में आयोजित गरिमापूर्ण समारोह में आज कविन्द्र गुप्ता ने हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण की। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। कविन्द्र गुप्ता ने हिंदी में शपथ ग्रहण की। लोक भवन में हुआ ऐतिहासिक समारोह लोक भवन में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’ के गायन से हुई, उसके बाद राष्ट्रगान हुआ। शपथ ग्रहण की रस्म पूरी होने के बाद फिर से ‘वंदे मातरम्’ गाया गया। नए राज्यपाल को समारोह के दौरान गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। इस मौके पर हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष और उनकी धर्मपत्नी मित्रा घोष खास तौर पर मौजूद रहे। हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, नवनियुक्त राज्यपाल की धर्मपत्नी बिन्दु गुप्ता, उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया और नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर भी इस अवसर पर उपस्थित थे। शपथ ग्रहण से पहले मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने राष्ट्रपति द्वारा जारी नियुक्ति पत्र पढ़ा। राज्यपाल के सचिव सी.पी. वर्मा ने औपचारिक तौर पर गुप्ता से कार्यभार ग्रहण प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर करवाए। समारोह में कई मंत्री, विधायक, वरिष्ठ अधिकारी, विश्वविद्यालयों के कुलपति और दूसरे गणमान्य लोग मौजूद रहे। पूजा-अर्चना के बाद मीडिया से बातचीत शपथ ग्रहण से पहले सुबह गुप्ता ने अपने परिवार के साथ पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में अपनी भावनाएं साझा कीं। उन्होंने इस संवैधानिक पद पर नियुक्त करने के लिए राष्ट्रपति का आभार जताया। उन्होंने कहा, “राज्यपाल का पद एक जिम्मेदारी है। यह किसी राजनीतिक दल से नहीं, बल्कि पूरे राज्य से जुड़ा होता है।” उन्होंने संविधान के मुताबिक काम करने और राज्य सरकार के साथ मिलकर चलने का भरोसा दिलाया। लद्दाख का अनुभव और हिमाचल के लिए प्राथमिकताएं लद्दाख के उप-राज्यपाल रह चुके गुप्ता को पहाड़ी इलाकों की अच्छी समझ है। उन्होंने बताया, “लद्दाख में सात महीने में मैंने 10,000 किलोमीटर से ज्यादा का सफर किया। वहां की भौगोलिक चुनौतियां हिमाचल से मिलती हैं।” उन्होंने हिमाचल के लोगों के आतिथ्य की तारीफ भी की। अपनी प्राथमिकताओं के बारे में उन्होंने कई बातें कहीं। शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल को और आगे ले जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “हिमाचल शिक्षा में अग्रणी है, इसे और बेहतर बनाने पर काम करूंगा।” राष्ट्रीय शिक्षा नीति को भारतीय मूल्यों के साथ लागू करने की बात भी उन्होंने कही। पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने को भी उन्होंने अहमियत दी। राज्य की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और धार्मिक पर्यटन को मजबूत करने पर भी काम करने की बात कही। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और जनजातीय विकास पर भी उनका जोर रहेगा। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए ‘नशामुक्त हिमाचल’ अभियान को और मजबूत करेंगे। इसके लिए खेल गतिविधियों और काउंसलिंग का सहारा लिया जाएगा। चीन से लगती सीमा पर बसे गांवों के विकास के लिए ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ को बढ़ावा देंगे। टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को पूरा करने के लिए भी खास प्रयास करने की बात उन्होंने कही। पुरानी परंपराओं को मिलेगा विस्तार पूर्व राज्यपालों द्वारा शुरू किए गए अच्छे कामों को आगे बढ़ाने का भी उन्होंने वादा किया। केंद्र की योजनाओं को दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचाने और वहां संपर्क व्यवस्था सुधारने पर भी काम होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार, विपक्ष और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर हिमाचल को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है। Post navigation बदलता मौसम, बदलती खेती: प्राकृतिक खेती कैसे बन रही है जलवायु संकट की ढाल संसद में उठा हिमाचल को केंद्रीय स्वास्थ्य योजनाओं के तहत मिली निधियों का मुद्दा