मंडी अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेले में प्राकृतिक खेती का संदेश, रसायनरहित आटा बिक्री के लिए उपलब्ध
धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था के प्रतीक मंडी अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेला में इस वर्ष कृषि जागरूकता का विशेष संदेश भी देखने को मिल रहा है। कृषि विभाग की आतमा परियोजना की ओर से लगाए गए स्टॉल का शुभारंभ प्रदेश के उपमुख्यमंत्री द्वारा किया गया। यह स्टॉल मेले में एक सप्ताह तक लगाया जाएगा, जहां आगंतुक प्राकृतिक खेती और उससे जुड़े उत्पादों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
इस स्टॉल की खास बात यह है कि पहली बार प्राकृतिक खेती से तैयार मक्की और गेहूं का रसायनरहित, पोषणयुक्त हिमभोग ब्रांड का आटा बिक्री के लिए उपलब्ध कराया गया है। मेले में आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक न केवल इसकी जानकारी ले रहे हैं, बल्कि इसे खरीदकर स्वस्थ विकल्प की ओर कदम भी बढ़ा रहे हैं।


पडडल ग्रांउड में प्रदर्शनी पंडाल पर लगे इस स्टॉल में प्राकृतिक खेती में प्रयोग होने वाले सभी प्रमुख घटकों की विस्तृत जानकारी प्रदर्शित की गई है। यहां तैनात अधिकारी आगंतुकों को प्राकृतिक खेती की विधि, उसके लाभ और इसे अपनाने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। साथ ही प्रदेश सरकार की राजीव गांधी प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के तहत की गई ऐतिहासिक पहलों के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।
जिला परियोजना निदेशक आतमा डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि इस स्टॉल का उद्देश्य केवल उत्पाद प्रदर्शित करना नहीं, बल्कि लोगों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा..
“यहां प्राकृतिक खेती के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। हमारे अधिकारी आगंतुकों को इस खेती पद्धति से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। सरकार द्वारा लॉन्च किए गए प्राकृतिक खेती के आटे को भी बिक्री के लिए रखा गया है, ताकि उपभोक्ता इसे खरीदकर इसकी गुणवत्ता और स्वाद का अनुभव कर सकें,”
उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ अन्न उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मेले जैसे बड़े आयोजन में इस स्टॉल के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों तक यह संदेश पहुंचाया जा रहा है।
मेले में पहुंचे लोगों ने भी इस पहल की सराहना की और प्राकृतिक खेती से जुड़े उत्पादों में रुचि दिखाई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार के जनजागरूकता अभियान निरंतर जारी रहें तो प्रदेश में प्राकृतिक खेती को और अधिक गति मिलेगी।
इस प्रकार, शिवरात्रि मेले के सांस्कृतिक उत्सव के बीच प्राकृतिक खेती का यह संदेश कृषि और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का नया आयाम जोड़ रहा है।

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